सूरजमुखी

सूरजमुखी एक महत्वपूर्ण खाद्य तिलहन (तेल वाली) फसल है, जिसे इसके उच्च गुणवत्ता वाले तेल के लिए जाना जाता है, जो असंतृप्त फैटी एसिड और विटामिन ई से भरपूर होता है।
इसकी व्यापक अनुकूलन क्षमता और प्रकाश के प्रति असंवेदनशील प्रकृति के कारण, सूरजमुखी की खेती विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में सिंचित और बारानी (असिंचित/सूखे) दोनों स्थितियों में की जा सकती है।
यह फसल भारत के खाद्य तेल उत्पादन में योगदान देती है और अनाज आधारित कृषि प्रणालियों में फसल विविधीकरण का समर्थन करती है।

आपके सूरजमुखी को फॉस्फोरस की आवश्यकता क्यों है?

मजबूत जड़ों का जमाव

फॉस्फोरस जड़ों के मजबूत विकास और फसल के शुरुआती जमाव को बढ़ावा देता है, जिससे पानी और पोषक तत्वों को कुशलता से सोखने (ग्रहण करने) में मदद मिलती है।

मुंडक का बेहतर विकास

फॉस्फोरस की उचित मात्रा मुंडक (फूल) के विकास, बीजों के निर्माण और बीजों के भराव में सहायता करती है, जिससे बीजों की पैदावार (उपज) में सुधार होता है।

तेल की बेहतर मात्रा

फॉस्फोरस का संतुलित पोषण बीजों में तेल की अधिक मात्रा, बीजों की बेहतर गुणवत्ता और पोषक तत्वों के उपयोग की क्षमता में सुधार करने में सहायता करता है।
कर्नाटक

सूरजमुखी

सरकार द्वारा अनुशंसित खाद की उपयुक्त मात्रा (किलो प्रति हेक्टेयर)

नाइट्रोजन

90

फॉस्फोरस

90

पोटेशियम

62.5

सूक्ष्मपोषक

जिंक सल्फेट

15

किलो

बोरेक्स

15

किलो

OCP Nutricrops TSP डोज़: P की आवश्यकता हेतु (किलो प्रति हेक्टेयर)

डोज़

195.3

इस्तेमाल का सही तरीका

बुआई के समय बीज के साथ-साथ शुरुआती एनपीके (NPK) खाद को भी गड्ढे में डालें।

चयनित राज्य: कर्नाटक

मुख्य उत्पादक राज्य: कर्नाटक

स्रोत: फसल की जानकारी

स्रोत: सरकार द्वारा अनुशंसित खाद की उपयुक्त मात्रा (किलो प्रति हेक्टेयर)