कुसुम

कुसुम एक मूल्यवान रबी तिलहन (तेल वाली) फसल है जिसकी खेती मुख्य रूप से बारानी (असिंचित/सूखे) परिस्थितियों में की जाती है क्योंकि इसमें सूखा सहने की उत्कृष्ट क्षमता होती है।
इसके बीजों से उच्च गुणवत्ता वाला खाद्य तेल प्राप्त होता है जो असंतृप्त फैटी एसिड से भरपूर होता है, जिससे यह पोषण और औद्योगिक उपयोग के लिए मूल्यवान बन जाता है।
कुसुम शुष्क भूमि कृषि प्रणालियों के लिए बहुत उपयुक्त है और कम नमी वाले क्षेत्रों में किसानों की आय के साधन बढ़ाने में मदद करता है।

आपके कुसुम को फॉस्फोरस की आवश्यकता क्यों है?

मजबूत शुरुआती
जमाव

फॉस्फोरस जड़ों के मजबूत विकास और फसल के शुरुआती जमाव को बढ़ावा देता है, जिससे मिट्टी की नमी को बेहतर तरीके से सोखने (ग्रहण करने) में मदद मिलती है।

कैपिटुलम का
बेहतर विकास

फॉस्फोरस की उचित मात्रा शाखाएं निकलने, फूल आने, कैपिटुलम (फूल/डोडी) के विकास और बीजों के भराव में सहायता करती है, जिससे बीजों की अधिक पैदावार (उपज) मिलती है।

बारानी (असिंचित) परिस्थितियों
में बेहतर क्षमता

फॉस्फोरस का संतुलित पोषण तिलहन की गुणवत्ता में सुधार करता है और बारानी (असिंचित/सूखे) परिस्थितियों में पोषक तत्वों के उपयोग की क्षमता को बढ़ाता है।
कर्नाटक

कुसुम

सरकार द्वारा अनुशंसित खाद की उपयुक्त मात्रा (किलो प्रति हेक्टेयर)

नाइट्रोजन

75

फॉस्फोरस

75

पोटेशियम

40

सल्फर

30

सूक्ष्मपोषक

जिंक सल्फेट

15

किलो

OCP Nutricrops TSP डोज़: P की आवश्यकता हेतु (किलो प्रति हेक्टेयर)

डोज़

162.75

इस्तेमाल का सही तरीका

बुआई के समय बीज के साथ-साथ शुरुआती एनपीके (NPK) खाद को भी गड्ढे में डालें।

चयनित राज्य: कर्नाटक

मुख्य उत्पादक राज्य: कर्नाटक

स्रोत: फसल की जानकारी

स्रोत: सरकार द्वारा अनुशंसित खाद की उपयुक्त मात्रा (किलो प्रति हेक्टेयर)