सरसों

सरसों भारत की प्रमुख खाद्य तिलहन (तेल वाली) फसलों में से एक है, जो घरेलू वनस्पति तेल उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
इसकी खेती मुख्य रूप से उत्तरी और मध्य भारत में बड़े पैमाने पर की जाती है और यह रबी के मौसम में किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
सरसों के बीज और तेल का उपयोग खाना पकाने, खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग), औषधीय उद्देश्यों और पशुओं के चारे (खली) के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है।

आपकी सरसों को फॉस्फोरस की आवश्यकता क्यों है?

जड़ों का जमाव और
पोषक तत्वों का अवशोषण

फॉस्फोरस जड़ों के मजबूत विकास और शुरुआती फसल के जमाव को बढ़ावा देता है, जिससे पानी और पोषक तत्वों को कुशलता से सोखने (ग्रहण करने) में मदद मिलती है।

फलियों का निर्माण और
तिलहन की पैदावार

फॉस्फोरस की उचित मात्रा शाखाएं निकलने, फूल आने, फलियों के निर्माण, बीजों के भराव और तिलहन की पैदावार (उपज) में सुधार करती है।

बीजों की गुणवत्ता और
तेल की मात्रा

फॉस्फोरस का संतुलित पोषण बीजों की गुणवत्ता, तेल की मात्रा और समग्र रूप से पोषक तत्वों के उपयोग की क्षमता को बढ़ाता है।
बिहार गुजरात हरियाणा झारखंड ओडिशा राजस्थान उत्तर प्रदेश पश्चिम बंगाल

सरसों

सरकार द्वारा अनुशंसित खाद की उपयुक्त मात्रा (किलो प्रति हेक्टेयर)

नाइट्रोजन

80

फॉस्फोरस

60

पोटेशियम

40

सल्फर

20

सूक्ष्मपोषक

अनुपलब्ध

OCP Nutricrops TSP डोज़: P की आवश्यकता हेतु (किलो प्रति हेक्टेयर)

डोज़

130

इस्तेमाल का सही तरीका

बुआई के समय इसे बिखेर कर डालें।

चयनित राज्य: झारखंड

मुख्य उत्पादक राज्य: राजस्थान, हरियाणा, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, गुजरात

स्रोत: फसल की जानकारी

स्रोत: सरकार द्वारा अनुशंसित खाद की उपयुक्त मात्रा (किलो प्रति हेक्टेयर)