मूंगफली

मूंगफली भारत की सबसे महत्वपूर्ण तिलहन (तेल वाली) फसलों में से एक है और खाद्य तेल का एक प्रमुख स्रोत है।
यह एक मूल्यवान खाद्य और नकदी फसल भी है जो किसानों की आय और ग्रामीण आजीविका में मदद करती है।
दलहनी फसल होने के कारण, यह नाइट्रोजन स्थिरीकरण (फिक्सेशन) के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता (उपजाऊपन) में सुधार करने में मदद करती है और फसल चक्र में अच्छी तरह से फिट बैठती है।

आपकी मूंगफली को फॉस्फोरस की आवश्यकता क्यों है?

जड़ों का विकास और
गांठ बनना

फॉस्फोरस मजबूत जड़ों के विकास को बढ़ावा देता है और जड़ों में गांठ बनने की प्रक्रिया में सुधार करता है, जो मूंगफली में जैविक रूप से नाइट्रोजन को स्थिर करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

ऊर्जा का संचार और
शुरुआती विकास

यह एटीपी (ATP) के निर्माण के लिए आवश्यक है, जिससे शुरुआत में पौधे को ताकत मिलती है, और उसे खेत में अच्छी तरह से स्थापित होने (जमने) तथा फूल आने में मदद मिलती है।

पैदावार और फलियों
का विकास

फॉस्फोरस की उचित मात्रा पैग (peg/सुइयां) बनने और फलियों के विकास में सुधार करती है, जिससे अंततः पैदावार (उपज) और तेल की मात्रा बढ़ती है।
तेलंगाना आंध्र प्रदेश तमिलनाडु

मूंगफली

सरकार द्वारा अनुशंसित खाद की उपयुक्त मात्रा (किलो प्रति हेक्टेयर)

नाइट्रोजन

30

फॉस्फोरस

40

पोटेशियम

50

सूक्ष्मपोषक

जिंक सल्फेट 50 किलो/हेक्टेयर + जिंक 5.0% + मैंगनीज 2.0% + आयरन 2.0% + बोरॉन 0.5%

5

किलो प्रति एकड़

जिप्सम

500

किलो प्रति हेक्टेयर

सूक्ष्म पोषक तत्वों का मिश्रण: 1 किलो प्रति एकड़

OCP Nutricrops TSP डोज़: P की आवश्यकता हेतु (किलो प्रति हेक्टेयर)

डोज़

86.8

इस्तेमाल का सही तरीका

फॉस्फोरस (P) की पूरी मात्रा बुआई के समय बिखेर कर डालें।

चयनित राज्य: आंध्र प्रदेश

मुख्य उत्पादक राज्य: आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु

स्रोत: फसल की जानकारी

स्रोत: सरकार द्वारा अनुशंसित खाद की उपयुक्त मात्रा (किलो प्रति हेक्टेयर)