मक्का

धान और गेहूँ के बाद, मक्का भारत की तीसरी सबसे महत्वपूर्ण अनाज फसल है।
इसका उपयोग भोजन, पोल्ट्री फीड (मुर्गी दाने) और कई औद्योगिक उत्पादों के लिए किया जाता है।
मक्का फसल विविधीकरण के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह विभिन्न प्रकार की जलवायु में आसानी से ढल जाती है और पानी के संसाधनों पर बढ़ते दबाव को कम करने में मदद करती है।

आपके मक्के को फॉस्फोरस की आवश्यकता क्यों है?

जड़ों की मजबूती और
शुरुआती विकास

फॉस्फोरस जड़ों के तेजी से विकास में सहायता करता है, जो फसल की शुरुआती मजबूती और स्थापना के लिए बेहद जरूरी है।

ऊर्जा हस्तांतरण और
पौधों का विकास

यह ATP के निर्माण में मुख्य भूमिका निभाता है, जिससे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया तेज होती है और पौधों में समग्र मजबूती आती है।

भुट्टा बनना और
दानों का भराव

पर्याप्त मात्रा में फॉस्फोरस मिलने से भुट्टे का आकार बढ़ता है, दानों का विकास बेहतर होता है और अंतिम उपज में सुधार होता है।
तेलंगाना आंध्र प्रदेश बिहार छत्तीसगढ़ कर्नाटक मध्य प्रदेश महाराष्ट्र ओडिशा पश्चिम बंगाल

मक्का

सरकार द्वारा अनुशंसित खाद की उपयुक्त मात्रा (किलो प्रति हेक्टेयर)

नाइट्रोजन

150

फॉस्फोरस

60

पोटेशियम

70

सूक्ष्मपोषक

जिंक सल्फेट

25

किलो प्रति हेक्टेयर

OCP Nutricrops TSP डोज़: P की आवश्यकता हेतु (किलो प्रति हेक्टेयर)

डोज़

130

इस्तेमाल का सही तरीका

बुआई के समय इसे बिखेर कर डालें।

चयनित राज्य: पश्चिम बंगाल

मुख्य उत्पादक राज्य: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र

स्रोत: फसल की जानकारी

स्रोत: सरकार द्वारा अनुशंसित खाद की उपयुक्त मात्रा (किलो प्रति हेक्टेयर)