चना

चना (बंगाल ग्राम) भारत की सबसे बड़ी दलहनी फसल है, जो आहार में प्रोटीन और पोषण सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
यह जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण (फिक्सेशन) के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता (उपजाऊपन) में सुधार करता है, जिससे कृत्रिम (सिंथेटिक) नाइट्रोजन उर्वरकों (खादों) पर निर्भरता कम होती है।
चना अनाज-आधारित फसल चक्रों में अच्छी तरह से फिट बैठता है और बारानी (असिंचित/सूखे) तथा सिंचित दोनों क्षेत्रों में किसानों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत प्रदान करता है।

आपके चने को फॉस्फोरस की आवश्यकता क्यों है?

जड़ों का विकास और
नाइट्रोजन स्थिरीकरण
(फिक्सेशन)

फॉस्फोरस जड़ों के विकास और प्रभावी ढंग से गांठ बनने को बढ़ावा देता है, जिससे जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण में सुधार होता है।

फलियों का निर्माण
और दानों का वजन

फॉस्फोरस की उचित मात्रा फूल आने, फलियों के निर्माण, बीजों (दानों) के विकास और उनके वजन को बढ़ाती है, जिससे पैदावार (उपज) में वृद्धि होती है।

सूखा सहनशीलता और
पोषक तत्वों की क्षमता

फॉस्फोरस का संतुलित पोषण पोषक तत्वों के उपयोग की क्षमता में सुधार करता है और कम नमी की स्थिति में भी फसल को बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करता है।
तेलंगाना आंध्र प्रदेश छत्तीसगढ़ गुजरात झारखंड कर्नाटक मध्य प्रदेश महाराष्ट्र राजस्थान उत्तर प्रदेश

चना

सरकार द्वारा अनुशंसित खाद की उपयुक्त मात्रा (किलो प्रति हेक्टेयर)

नाइट्रोजन

20

फॉस्फोरस

40

सूक्ष्मपोषक

अनुपलब्ध

OCP Nutricrops TSP डोज़: P की आवश्यकता हेतु (किलो प्रति हेक्टेयर)

डोज़

87

इस्तेमाल का सही तरीका

बुआई के समय 100% मात्रा शुरुआती खाद के रूप में डालें। उर्वरकों (खादों) को बीज के साथ सीड-कम-फर्टिलाइजर ड्रिल का उपयोग करके एक साथ डालना चाहिए।

चयनित राज्य: गुजरात

मुख्य उत्पादक राज्य: राजस्थान, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़

स्रोत: फसल की जानकारी

स्रोत: सरकार द्वारा अनुशंसित खाद की उपयुक्त मात्रा (किलो प्रति हेक्टेयर)