आलू

आलू भारत की सबसे महत्वपूर्ण कंद वाली फसल है और अपनी उच्च उत्पादकता और पोषण मूल्य के कारण यह एक मुख्य भोजन, सब्जी और औद्योगिक कच्चे माल के रूप में काम आती है।
भारत दुनिया भर में आलू का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, और इसकी खेती खाद्य सुरक्षा, प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) उद्योगों और किसानों की आजीविका में सहायता करती है।
आलू कार्बोहाइड्रेट, विटामिन सी, पोटेशियम और आहार फाइबर से भरपूर होता है, जो इसे संतुलित आहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाता है।

आपके आलू को फॉस्फोरस की आवश्यकता क्यों है?

जड़ों और
स्टोलन का विकास

फॉस्फोरस जड़ों के शुरुआती जमाव और स्टोलन (भूमिगत तने) के विकास को बढ़ावा देता है, जिससे कंद (आलू) बनने के लिए एक मजबूत आधार तैयार होता है।

कंद (आलू) की पैदावार
और आकार

फॉस्फोरस की उचित मात्रा कंद बनने की शुरुआत, उनके आकार में वृद्धि और शुष्क पदार्थ के जमाव को बढ़ाती है, जिससे बाजार में बिकने योग्य उपज (पैदावार) अधिक मिलती है।

गुणवत्ता और
भंडारण क्षमता

फॉस्फोरस का संतुलित पोषण पोषक तत्वों के उपयोग की क्षमता में सुधार करता है और कंद (आलू) की बेहतर गुणवत्ता, अधिक समय तक भंडारण (स्टोर) करने की क्षमता और प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) के लिए उपयुक्तता बढ़ाने में योगदान देता है।
बिहार गुजरात हरियाणा झारखंड पंजाब उत्तर प्रदेश पश्चिम बंगाल

आलू

सरकार द्वारा अनुशंसित खाद की उपयुक्त मात्रा (किलो प्रति हेक्टेयर)

नाइट्रोजन

150

फॉस्फोरस

90-100

पोटेशियम

100-120

सूक्ष्मपोषक

अनुपलब्ध

OCP Nutricrops TSP डोज़: P की आवश्यकता हेतु (किलो प्रति हेक्टेयर)

डोज़

196-217

इस्तेमाल का सही तरीका

बुआई के समय इसे बिखेर कर डालें।

चयनित राज्य: बिहार

मुख्य उत्पादक राज्य: पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, गुजरात

स्रोत: फसल की जानकारी

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स्रोत: सरकार द्वारा अनुशंसित खाद की उपयुक्त मात्रा (किलो प्रति हेक्टेयर)