गेहूँ

धान के बाद गेहूँ भारत का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण खाद्यान्न है और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा में इसका बहुत बड़ा योगदान है।
भारत-गंगा के मैदानी इलाकों में इसकी बड़े पैमाने पर खेती की जाती है और यह भारतीय आबादी के एक बड़े हिस्से का मुख्य भोजन है।
गेहूँ की खेती लाखों किसानों को आजीविका प्रदान करती है और देश की कृषि अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती है।

आपके गेहूँ को फॉस्फोरस की आवश्यकता क्यों है?

जड़ों का विकास और
पोषक तत्वों का अवशोषण

फॉस्फोरस जड़ों के मजबूत विकास को बढ़ावा देता है, जिससे फसल के शुरुआती विकास के दौरान पानी और पोषक तत्वों को कुशलता से सोखने (ग्रहण करने) में मदद मिलती है।

पैदावार और दानों की
गुणवत्ता

फॉस्फोरस की उचित मात्रा कल्ले निकलने, बालियां बनने और दानों के भराव में मदद करती है, जिससे दानों की पैदावार (उपज) और गुणवत्ता बेहतर होती है।

तनाव सहनशीलता
और क्षमता

फॉस्फोरस का संतुलित पोषण, पोषक तत्वों के उपयोग की क्षमता को बढ़ाता है और फसल को नमी की कमी और पर्यावरणीय तनाव (प्रतिकूल परिस्थितियों) में भी बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करता है।
बिहार छत्तीसगढ़ गुजरात हरियाणा झारखंड मध्य प्रदेश महाराष्ट्र पंजाब राजस्थान उत्तर प्रदेश

गेहूँ

सरकार द्वारा अनुशंसित खाद की उपयुक्त मात्रा (किलो प्रति हेक्टेयर)

नाइट्रोजन

120

फॉस्फोरस

40

पोटेशियम

20

सूक्ष्मपोषक

एफवाईएम

20

टन

थायोयूरिया

0.05%

(कल्ले निकलते समय 60 लीटर पानी में)

जिंक सल्फेट 33%

12 किलो

या

जिंक सल्फेट (21%) और 1.5 किलो अनबुझा चूना

2.5 किलो

(500 लीटर पानी में मिलाकर, 15 दिनों के अंतराल के बाद दोहराएं)

OCP Nutricrops TSP डोज़: P की आवश्यकता हेतु (किलो प्रति हेक्टेयर)

डोज़

88

इस्तेमाल का सही तरीका

बुआई के समय पूरे टीएसपी को सीड ड्रिल के द्वारा या बिखेर कर डालें। टीएसपी से फॉस्फोरस (P) डालते समय 45 किलो यूरिया प्रति हेक्टेयर मिलाएँ।

चयनित राज्य: राजस्थान

मुख्य उत्पादक राज्य : पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र, गुजरात

स्रोत: फसल की जानकारी

स्रोत: सरकार द्वारा अनुशंसित खाद की उपयुक्त मात्रा (किलो प्रति हेक्टेयर)