जौ

जौ एक महत्वपूर्ण रबी अनाज फसल है जिसे कम उपजाऊ वातावरण के अनुकूल होने के कारण सिंचित और बारानी (असिंचित/सूखे) दोनों क्षेत्रों में उगाया जाता है।

इसका उपयोग भोजन, पशुओं के चारे, माल्ट और शराब उद्योगों के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है, जो इसे आर्थिक रूप से एक महत्वपूर्ण फसल बनाता है।
जौ को अपेक्षाकृत कम लागत की आवश्यकता होती है और यह सूखे तथा खारी मिट्टी की स्थिति में भी अच्छा प्रदर्शन करती है, जिससे टिकाऊ कृषि प्रणालियों को सहायता मिलती है।

आपके जौ को फॉस्फोरस की आवश्यकता क्यों है?

मजबूत जड़ों का जमाव

फॉस्फोरस जड़ों के शुरुआती जमाव को बढ़ावा देता है, जिससे पोषक तत्वों और नमी को बेहतर तरीके से सोखने (ग्रहण करने) में मदद मिलती है।

बालियों का बेहतर विकास

फॉस्फोरस की उचित मात्रा कल्ले निकलने, बालियों के विकास और दानों के निर्माण में सुधार करती है, जिससे अधिक उत्पादकता (पैदावार) मिलती है।

दानों की बेहतर गुणवत्ता

फॉस्फोरस का संतुलित पोषण फसल की ताकत को बढ़ाता है और विभिन्न प्रकार की कृषि परिस्थितियों में दानों की गुणवत्ता में सुधार करता है।
हरियाणा राजस्थान

जौ

सरकार द्वारा अनुशंसित खाद की उपयुक्त मात्रा (किलो प्रति हेक्टेयर)

नाइट्रोजन

80

फॉस्फोरस

40

पोटेशियम

24

सूक्ष्मपोषक

एफवाईएम

20

टन

जिंक सल्फेट
33%

15

किलो

OCP Nutricrops TSP डोज़: P की आवश्यकता हेतु (किलो प्रति हेक्टेयर)

डोज़

88

इस्तेमाल का सही तरीका

बुआई के समय पूरे टीएसपी को सीड ड्रिल के द्वारा या बिखेर कर डालें। टीएसपी से फॉस्फोरस (P) डालते समय 45 किलो यूरिया प्रति हेक्टेयर मिलाएँ।

चयनित राज्य: राजस्थान

मुख्य उत्पादक राज्य: राजस्थान, हरियाणा

स्रोत: फसल की जानकारी

स्रोत: सरकार द्वारा अनुशंसित खाद की उपयुक्त मात्रा (किलो प्रति हेक्टेयर)