कपास

भारत दुनिया के सबसे बड़े कपास उत्पादकों और निर्यातकों में से एक है।
एक प्रमुख कमर्शियल फसल के रूप में, कपास खरीफ के मौसम में लगभग 11-12 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में उगाई जाती है।
कपास लाखों किसानों को सहायता प्रदान करती है और ओटाई, दबाई व परिवहन जैसी संबद्ध गतिविधियों को गति देती है।

आपके कपास को फॉस्फोरस की आवश्यकता क्यों है?

मजबूत जड़ें और फसल
की शुरुआती मजबूती

फॉस्फोरस जड़ों के गहरे विकास को बढ़ावा देता है, जिससे कपास के पौधों को जल्दी स्थापित होने, शुरुआती तनाव (सूखा या मौसम की मार) को सहन करने और मिट्टी के पोषक तत्वों का अधिक कुशलता से उपयोग करने में मदद मिलती है।

पुष्पण, टिंडे बनना और
उनका ठहराव

यह ऊर्जा हस्तांतरण (ATP) में सहायता करता है, जो फूल आने के समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। इससे टिंडे बेहतर तरीके से बनते हैं, उनका झड़ना कम होता है और पूरी फसल में एकसमान विकास आता है।

उपज और फाइबर (रेशे) की
गुणवत्ता में सुधार

पर्याप्त मात्रा में फॉस्फोरस मिलने से टिंडे का आकार बढ़ता है, बीजों का विकास बेहतर होता है, और उपज के साथ-साथ रेशे की मजबूती और गुणवत्ता में भी सुधार होता है।
तेलंगाना आंध्र प्रदेश गुजरात हरियाणा मध्य प्रदेश महाराष्ट्र पंजाब राजस्थान तमिलनाडु

सिंचित कपास (संकर)

सरकार द्वारा अनुशंसित खाद की उपयुक्त मात्रा (किलो प्रति हेक्टेयर)

नाइट्रोजन

240

फॉस्फोरस

50

पोटेशियम

150

सूक्ष्मपोषक

अनुपलब्ध

OCP Nutricrops TSP डोज़: P की आवश्यकता हेतु (किलो प्रति हेक्टेयर)

डोज़

109

इस्तेमाल का सही तरीका

बुआई से पहले मिट्टी में अच्छी तरह मिला लें या बीज-उर्वरक ड्रिल का इस्तेमाल करके बीजों के साथ ही डालें।

चयनित राज्य: गुजरात

मुख्य उत्पादक राज्य: मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा, गुजरात, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पंजाब, राजस्थान

स्रोत: फसल की जानकारी

स्रोत: सरकार द्वारा अनुशंसित खाद की उपयुक्त मात्रा (किलो प्रति हेक्टेयर)