मूँगफली
मूँगफली भारत की सबसे महत्वपूर्ण तिलहन फसलों में से एक है और खाद्य तेल का एक प्रमुख स्रोत है।
यह एक मूल्यवान खाद्य और नकदी फसल भी है जो किसानों की आय और ग्रामीण आजीविका को सहारा देती है।
एक फलीदार फसल, जो नाइट्रोजन स्थिरीकरण के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मदद करती है और फसल चक्र के लिए बिल्कुल अनुकूल है।
आपके मूँगफली को फॉस्फोरस की आवश्यकता क्यों है?
जड़ों का विकास और
गांठों का बनना
फॉस्फोरस जड़ों के मजबूत विकास को बढ़ावा देता है और जड़ों में गांठों के बनने की प्रक्रिया को तेज करता है, जो मूँगफली में जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण के लिए बेहद जरूरी है।
ऊर्जा हस्तांतरण और
शुरुआती विकास
यह ATP के निर्माण के लिए आवश्यक है, जिससे पौधों को शुरुआती मजबूती मिलती है, फसल बेहतर तरीके से स्थापित होती है और फूल आने में मदद मिलती है।
फलियों का विकास
और उपज
पर्याप्त मात्रा में फॉस्फोरस मिलने से सुइयाँ या पैग बनने और फलियों के विकास में सुधार होता है, जिससे अंततः उपज और तेल की मात्रा बढ़ती है।
मूँगफली - वर्षा-आधारित
सरकार द्वारा अनुशंसित खाद की उपयुक्त मात्रा (किलो प्रति हेक्टेयर)
नाइट्रोजन
20
फॉस्फोरस
40
पोटेशियम
40
सल्फर
20
सूक्ष्मपोषक
अनुपलब्ध
OCP Nutricrops TSP डोज़: P की आवश्यकता हेतु (किलो प्रति हेक्टेयर)
डोज़
87
इस्तेमाल का सही तरीका
बुआई के समय, इसे बीज-उर्वरक ड्रिल द्वारा मिट्टी में डालें
मूँगफली - सिंचित
सरकार द्वारा अनुशंसित खाद की उपयुक्त मात्रा (किलो प्रति हेक्टेयर)
नाइट्रोजन
40
फॉस्फोरस
90
पोटेशियम
40
सल्फर
20
सूक्ष्मपोषक
अनुपलब्ध
OCP Nutricrops TSP डोज़: P की आवश्यकता हेतु (किलो प्रति हेक्टेयर)
डोज़
196
इस्तेमाल का सही तरीका
बुआई के समय, इसे बीज-उर्वरक ड्रिल द्वारा मिट्टी में डालें
चयनित राज्य: राजस्थान
मुख्य उत्पादक राज्य: आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना
स्रोत: फसल की जानकारी
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