मक्का

धान और गेहूँ के बाद, मक्का भारत की तीसरी सबसे महत्वपूर्ण अनाज फसल है।
इसका उपयोग भोजन, पोल्ट्री फीड (मुर्गी दाने) और कई औद्योगिक उत्पादों के लिए किया जाता है।
मक्का फसल विविधीकरण के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह विभिन्न प्रकार की जलवायु में आसानी से ढल जाती है और पानी के संसाधनों पर बढ़ते दबाव को कम करने में मदद करती है।

आपके मक्के को फॉस्फोरस की आवश्यकता क्यों है?

जड़ों की मजबूती और
शुरुआती विकास

फॉस्फोरस जड़ों के तेजी से विकास में सहायता करता है, जो फसल की शुरुआती मजबूती और स्थापना के लिए बेहद जरूरी है।

ऊर्जा हस्तांतरण और
पौधों का विकास

यह ATP के निर्माण में मुख्य भूमिका निभाता है, जिससे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया तेज होती है और पौधों में समग्र मजबूती आती है।

भुट्टा बनना और
दानों का भराव

पर्याप्त मात्रा में फॉस्फोरस मिलने से भुट्टे का आकार बढ़ता है, दानों का विकास बेहतर होता है और अंतिम उपज में सुधार होता है।
तेलंगाना आंध्र प्रदेश बिहार गुजरात हरियाणा झारखंड कर्नाटक मध्य प्रदेश पंजाब राजस्थान तमिलनाडु उत्तर प्रदेश पश्चिम बंगाल

मक्का

सरकार द्वारा अनुशंसित खाद की उपयुक्त मात्रा (किलो प्रति हेक्टेयर)

नाइट्रोजन

40-60

फॉस्फोरस

20-30

पोटेशियम

15-20

सूक्ष्मपोषक

जिंक सल्फेट

20

किलो प्रति हेक्टेयर

OCP Nutricrops TSP डोज़: P की आवश्यकता हेतु (किलो प्रति हेक्टेयर)

डोज़

66

इस्तेमाल का सही तरीका

बुआई के समय, इसे छिड़ककर या बीज-उर्वरक ड्रिल के ज़रिए डालें

चयनित राज्य: पंजाब

मुख्य उत्पादक राज्य: उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, पंजाब , राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना

स्रोत: फसल की जानकारी

स्रोत: सरकार द्वारा अनुशंसित खाद की उपयुक्त मात्रा (किलो प्रति हेक्टेयर)

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